गंगा में स्नान के लिए पर्याप्त जल ही नहीं,गंगा में पानी घटाए जाने से श्रद्धालुओं में रोष व्याप्त

मोरना ( मुजफ्फरनगर)। कार्तिक गंगा मेले को लेकर आला अधिकारियों की उदासीनता से नगरवासियों को समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। श्रद्धालुओं ने सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर जवाब मांगें हैं। गंगा में जलस्तर कम हो जाने के कारण मोटरबोट चालकों के सामने रोजगार की समस्या खड़ी हो गई है। श्रद्धालुओं को भी गंगा स्नान करने में कठिनाई आ रही है। गंदगी ने गंगा घाट को जकड़ रखा है। वहीं, पर्यटन विभाग द्वारा कराए जा रहे निर्माण में जेसीबी ने पानी सप्लाई और टेलीफोन की वायर काट दिए हैं, जिससे नगरवासी लाचार और बेबस नजर आए।
शुकतीर्थ तीर्थधाम में कार्तिक गंगा मेले का आयोजन के कुछ दिन शेष बचे हैं, जिसके चलते नगर में श्रद्धालुओं का आगमन होने लगा है। गंगा में पानी घटाए जाने से श्रद्धालुओं में रोष बना हुआ है, जिसके चलते बोट संचालक राकेश, शिवकुमार, प्रमोद, दीपक, बिजेंद्र, धर्मेंद्र, रामकुमार और प्रभात आदि ने बताया कि हम सभी लोगों की बोटों में डीजल इंजन लगे हुए हैं। गंगा में जल की स्थिति घटाए जाने के कारण हम लोगों को डंडे के सहारे मोटरबोट का चलाना पड़ रहा है। कहीं-कहीं तो मोटरबोट पानी कम होने की वजह से गंगा की धारा के बीच में जमीन से टकराने पर खड़ी हो जाती है। पिलखुवा हापुड़ से आए श्रद्धालु विनोद कुमार, सोनिया, विनीता, सोहनवीर, विजयकांत, विचित्रवीर सिंह, शामली से आए विजय गोयल, परमीत, संजीव आदि ने बताया कि गंगा में स्नान करने के लिए धारा के बीच जाकर स्नान करने के लाले पड़ गए। बच्चा भी गंगा में पैदल चलकर पार कर रहा है। यह सरकार की कैसी व्यवस्था है कि गंगा में स्नान के लिए श्रद्धालुओं को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। वहीं, गंगा मेले में साफ-सफाई का जिम्मा नगर पंचायत भोकरहेड़ी, जानसठ और मीरापुर को दिया जाता है। हालांकि गंगा घाट पर जमी गंदगी और पॉलिथीन, कपड़े, पूजा सामग्री को वहां से हटाने की हिम्मत अभी तक किसी ने नहीं दिखाई। दुर्गंध और गंदगी देेखकर श्रद्धालु वहां स्नान करना मुनासिब नहीं समझ रहे हैं। पर्यटन विभाग के द्वारा नगर में विशाल गेट का निर्माण कराया जाना है, जिसके चलते अधिकारियों ने सड़क को उखाड़कर बड़े गड्ढे को खोदने के लिए जेसीबी का प्रयोग किया। जेसीबी ने टेलीफोन और पानी की पाइप लाइन को काटकर नगर की पेयजल आपूर्ति को ठप कर दिया है, जिससे नगरवासियों और साधु संतों के सामने पानी की समस्या परेशानी बनी हुई है।